बिहार में विशेष सर्वेक्षण एवं DILRMP (Digital India Land Records and Modernization Programme) : संविदा कर्मियों के साथ अन्याय


भारत सरकार ने वर्ष 2008 में
डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइज़ेशन प्रोग्राम (DILRMP) शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण करना, विवादों को कम करना और जनता को पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इस कार्यक्रम में –

  • भूमि अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण,

  • सर्वेक्षण(Survey)/पुनः सर्वेक्षण( Resurvey),

  • रजिस्ट्री और भूमि रिकॉर्ड का आपसी एकीकरण,

  • आधुनिक तकनीक (ETS, Drone, GIS) से नक्शे बनाना,

  • और जनता को ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है।

बिहार में इस सर्वेक्षण को  विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम (Vishesh Sarvekshan evam Bandobast Karyakram) के रूप में लागू किया गया है। यह बेहद ज़रूरी है क्योंकि बिहार के ज़्यादातर भूमि रिकॉर्ड अंग्रेज़ों के समय (1905–1915) के हैं, जो आज की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते। पुराने रिकॉर्ड और गलत सीमांकन के कारण बिहार में हज़ारों भूमि विवाद लंबित हैं।

संविदा कर्मियों पर आधारित मॉडल

दुर्भाग्यवश, बिहार में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का पूरा भार संविदा कर्मियों – अमीन, कानूनगो और तकनीकी कर्मचारियों – पर डाला गया है।

  • अन्य राज्यों में DILRMP का कार्य स्थायी/नियमित कर्मचारियों या बाद में नियमित किए गए स्टाफ द्वारा किया जा रहा है।

  • लेकिन बिहार में वर्षों से कार्यरत कर्मी केवल अनुबंध (Contract) पर हैं, जिनके पास न तो नौकरी की सुरक्षा है और न ही स्थायी लाभ (जैसे पेंशन, भत्ता आदि)।

राज्यों की तुलना: बिहार बनाम अन्य राज्य

भारत के कई राज्यों में DILRMP के तहत पुनः सर्वेक्षण कार्य हो रहा है। लेकिन रोजगार मॉडल में भारी अंतर है:

  • गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक जैसे राज्यों में सर्वेक्षण कर्मियों को स्थायी नियुक्ति या probation के बाद नियमित दर्जा दिया जाता है।

  • ओडिशा में भी अमीन पद स्थायी रूप से भरे जाते हैं।

  • लेकिन बिहार में "विशेष सर्वे अमीन" पूरी तरह संविदा पर हैं, जिन्हें न तो स्थायी दर्जा दिया गया है और न ही भविष्य की सुरक्षा।

राज्य

सर्वेक्षण प्रारंभ

पद

नियुक्ति का प्रकार

वेतन/लाभ

गुजरात

2008

सर्वेयर

5 वर्ष contract, बाद में permanent

₹40,800, स्थायी होने पर Pay Level-5

पश्चिम बंगाल

2019

Sub Surveyor

स्थायी

Pay Level-7

ओडिशा

2010

अमीन

स्थायी

Pay Level-3

बिहार

2020

Special Survey Amin

केवल संविदा

₹35,000, कोई लाभ नहीं

आंध्र प्रदेश

2020

Village Surveyor

2 वर्ष probation, फिर स्थायी

₹15,000 (probation), फिर Grade-3 Pay Scale

राजस्थान

2009

पटवारी

स्थायी

Pay Band-1 (Grade Pay-5)

कर्नाटक

2018

Land Surveyor

संविदा पर, regularization का वादा

Pay Level-6


परिणाम

  • नौकरी असुरक्षित → अनुभवी कर्मचारी कभी भी बाहर हो सकते हैं।

  • असमानता → अन्य राज्यों के स्थायी कर्मचारियों को बेहतर वेतन व सुविधाएँ मिलती हैं, जबकि बिहार में यही कार्य करने वाले कर्मियों को न्यूनतम लाभ भी नहीं।

  • गुणवत्ता प्रभावित → बार-बार कर्मचारियों के बदलने से अनुभव और दक्षता का नुकसान होता है।

हमारी भूमिका और योगदान

हम संविदा कर्मी ही वो लोग हैं जिन्होंने –

  • कठिन परिस्थितियों में ज़मीनी सर्वेक्षण किया,

  • सीमांकन एवं विवाद निपटाए,

  • और रिकॉर्ड डिजिटाइज कर बिहार को नए दौर में लाने की नींव रखी।
    बिना हमारे परिश्रम के DILRMP की सफलता बिहार में संभव ही नहीं है।

हमारी न्यायसंगत माँगें

हमारी माँगें स्पष्ट और तर्कसंगत हैं:

  1. विशेष सर्वेक्षण कर्मी यथा विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी/विशेष सर्वेक्षण कानूनगो/विशेष सर्वेक्षण अमीन/विशेष सर्वेक्षण लिपिक की सेवा नियमित/ 60 वर्ष किया जाय।

  2. विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी/विशेष सर्वेक्षण कानूनगो/विशेष सर्वेक्षण अमीन/विशेष सर्वेक्षण लिपिक को क्रमशः सहायक अभियंता असैनिक(AE),कनीय अभियंता असैनिक (JE), उच्चवर्गीय लिपिक (UDC) के पद पर नियमित नियुक्ति में प्रतिवर्ष कार्य अनुभव हेतु 5 अंक की अधिमानता दिया जाय।

  3. विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी/विशेष सर्वेक्षण कानूनगो/विशेष सर्वेक्षण अमीन/विशेष सर्वेक्षण लिपिक को क्रमशः सहायक अभियंता असैनिक(AE),कनीय अभियंता असैनिक (JE), निम्नवर्गीय/उच्चवर्गीय लिपिक (UDC) के समतुल्य वरीयता के अनुसार वेतन प्रदान किया जाय।

  4. दिनांक 07/06/2022 एवं 21/01/2023 को संघ के मांगो पर निदेशक भू अभिलेख एवं परिमाप बिहार,पटना और संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता-सह-बैठक में मांगो पर बनी सहमति के आलोक में आदेश निर्गत किया जाय।

  5. सभी सर्वेक्षण कर्मियों को ESIC कार्ड उपलब्ध कराया जाय साथ ही EPFO में सरकार के तरफ से अंशदान प्रदान किया जाय।

क्यों कर रहे हैं हम हड़ताल?

हमारी हड़ताल सिर्फ़ अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि पूरे बिहार की भूमि व्यवस्था के भविष्य के लिए है।
यदि प्रशिक्षित संविदा कर्मचारी असुरक्षित स्थिति के कारण नौकरी छोड़ने को मजबूर होंगे, तो विशेष सर्वेक्षण और DILRMP दोनों अधूरे रह जाएँगे।

इसलिए हम सरकार से अपील करते हैं कि संविदा कर्मियों को सम्मानजनक दर्जा और सुरक्षा दी जाए, ताकि बिहार DILRMP को सफलतापूर्वक लागू कर सके।


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